Another rant about the sci-fi genre.

I’ve seen the film ‘The Time Traveler’s Wife’ described as a “romantic sci-fi drama”. That displays an astounding ignorance about what sci-fi (SCIENCE-fiction) means: “A man with a GENETIC condition that causes him to SUDDENLY DISAPPEAR into the near future or past…” is not a premise based on any remotely plausible concept of science and therefore is not a sci-fi story.
What it is, is a ‘Deus ex machina’ cop-out tool used by an incompetent thinker. To be fair, if the author didn’t call it sci-fi themselves, then it’s not their fault. I guess it’s more likely the lazy book reviewers that are to blame.
Leave the science out of it, call it plain and simple fiction. Mentioning ‘genes’ or ‘time-travel’ does not make it sci-fi.

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जिस देश में गंगा बहती है

होठों पे सच्चाई रहती है
जहाँ दिल में सफ़ाई रहती है
हम उस देश के वासी हैं, हम उस देश के वासी हैं
जिस देश में गंगा बहती है

मेहमां जो हमारा होता है
वो जान से प्यारा होता है
ज़्यादा की नहीं लालच हमको
थोड़े मे गुज़ारा होता है
थोड़े मे गुज़ारा होता है
बच्चों के लिये जो धरती माँ
सदियों से सभी कुछ सहती है
हम उस देश के वासी हैं,
हम उस देश के वासी हैं
जिस देश में गंगा बहती है

कुछ लोग जो ज़्यादा जानते हैं
इन्सान को कम पहचानते हैं
ये पूरब है पूरबवाले
हर जान की कीमत जानते हैं
हर जान की कीमत जानते हैं
मिल जुल के रहो और प्यार करो
एक चीज़ यही जो रहती है
हम उस देश के वासी हैं,
हम उस देश के वासी हैं
जिस देश में गंगा बहती है
होठों पे सच्चाई रहती है…

जो जिससे मिला सिखा हमने
गैरों को भी अपनाया हमने
मतलब के लिये अन्धे होकर
रोटी को नही पूजा हमने
रोटी को नही पूजा हमने
अब हम तो क्या सारी दुनिया
सारी दुनिया से कहती है
हम उस देश के वासी हैं,
हम उस देश के वासी हैं
जिस देश में गंगा बहती है

होठों पे सच्चाई रहती है
जहां दिल में सफ़ाई रहती है
हम उस देश के वासी हैं,
हम उस देश के वासी हैं
जिस देश में गंगा बहती है

Happy Independence Day to all!